*सशिमं डौंडीलोहारा मे मनाया गया गुरु पूर्णिमा पर्व*
*डौंडीलोहारा :-* स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर डौंडीलोहारा मे गुरु पूर्णिमा पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में विद्यालय के आचार्य श्री उमेश कुमार देवांगन ने गुरू की महिमा का बखान करते हुए कहा कि गुरू का शाब्दिक अर्थ है कि गु मतलब अंधकार और रू का मतलब प्रकाश, अर्थात अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला गुरू ही होता है। गुरू पूर्णिमा के दिन ही भगवान व्यास का जन्मदिन को भी गुरूपूर्णिमा के रूप मे मनाते हैं।, और इन्होने ही महाकाव्य एवं 18 पुराण एवं 6 शास्त्र का भी रचना किया। योगी भगवान शंकर ने तंत्र के आधार पर सप्त ऋषियों की उत्पत्ति किया,। महर्षि व्यास ने ऋचाओं का संकलन करके वेदों का निर्माण किया। 31 सौ सालों अर्थात 5000 वर्ष पूर्व वेदव्यास चार ऋषि को शिष्य बनाया और सबने अलग अलग समय मे वेदों कि रचना किया जिसमे यैल नामक ऋषि ने ऋग्वेद की रचना किया उसमे 21 ऋचाएं, जैमिनी नामक ऋषि को सामवेद की रचना की उसमे 1000 ऋचाएं हैं तथा वैमनस्य नामक ऋषि ने यजूर्वेद की रचना किया, इसमे 100 ऋचाएं है और सुमंत नामक ऋषि ने अथर्ववेद की रचना कि इसमे 9 ऋचाएं हैं इन सभी ने अलग अलग समय मे रचना किया। तथा साथ ही साथ मुख्य वक्ता ने बताया कि '' गुरू गोविंद दोऊ खडे़, काके लागु पाय। बलिहारी गुरू आपने गोविंद दियो बताय। इसका तात्पर्य यह है कि भगवान को भी गुरू की शरण लेना पडता है, बिना गुरू के ज्ञान की प्राप्ति नहीं होती है। इस प्रकार इस कार्यक्रम में संस्था के प्राचार्य श्री तोरण सिंह ठाकुर, प्रताप सिंह, तोषण कुमार चुरेन्द्र, संजय देहारी, सेवंत देवांगन, आचार्या श्रीमती प्रतिभा सुकतेल, नंदिनी चंद्राकर, मंजू श्रीवास, भान बाई लटिये, सुरेखा अटल, कुमारी संगीता सोनी, सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकायें उपस्थित थे।
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शनिवार, 28 जुलाई 2018
गुरु पूर्णिमा
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