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बुधवार, 20 सितंबर 2017

दो दिवसीय खेल एवं बौद्धिक प्रतियोगिता का समापन

*दो दिवसीय खेल एवं बौद्धिक प्रतियोगिता का समापन*-
*डौंडीलोहारा*- विद्या भारती सरस्वती शिक्षा संस्थान रायपुर के निर्देशानुसार स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर डौंडीलोहारा मे जिला स्तरीय दो दिवसीय क्रिडा एवं बौद्धिक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र मे मुख्य अतिथि श्रीमान हस्तीमल जी सांखला (विधायक प्रतिनिधि ) विशेष अतिथि श्री अंकालु राम साहू (संयोजक स.शि.मं. अछोली) एवं अध्यक्षता श्री गोरेलाल राजपूत जी ने किया ।बौद्धिक प्रभारी श्री भीषम साहू ने बौद्धिक एवं क्रिडा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।उन्होनें बताया कि इस प्रतियोगिता में दल्लीराजहरा, बालोद, गुरुर,कुसुमकसा व डौंडीलोहारा के कुल 172 प्रतिभागी सम्मलित हुए।
समापन कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि के रूप मे श्रीमान प्रेमचंद भंसाली (नगर पंचायत अध्यक्ष) विशेष अतिथि श्री रत्तीभाई पटेल (जिला प्रतिनिधि )श्रीमती भारती देवागंन (पार्षद)श्रीमती आशा परिहार (समाज सेविका) एवं अध्यक्षता श्री सियाराम जी सार्वा (सचिव सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति छ.ग.) बिलासपुर कोनी ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथी ने प्रतियोगिता मे प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को परस्कृत किया।
उपरोक्त प्रतियोगिता मे प्रभारी के रूप मे श्री भीषम साहू,(प्राचार्य बालोद)श्री दीनदयाल साहू ,निर्णायक (गुरुर),श्री तोषण चुरेन्द्र निर्णायक (डौंडीलोहारा),हेमंत साहू (बालोद)पवन गौतम(बालोद),श्रीमती सुप्रिया ठाकुर निर्णायक(दल्लीराजहरा) साथ ही संस्था के प्राचार्य श्री खिलावन सिंह साहू, आचार्य तोरण ठाकुर ,प्रताप पटेल,अशोक सिन्हा,सुरेश ठाकुर ,सेवंत देवागंन,उमेश देवागंन,संजय देहारी,शीतल साय कोसमा ,आचार्या श्रीमती प्रतिभा सुकतेल,नंदिनी चन्द्राकर,भान बाई लटिये,संगीत सोना,मंजू श्रीवास तथा नवज्ञानोदय शिक्षण समिति के समस्त सदस्य उपस्थित थे।
उपरोक्त जानकारी प्रचार-प्रसार प्रमुख आचार्य श्री शीतल साय कोसमा ने दी।

शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

परीक्षा परिणाम २०१७

सरस्वती शिशु मंदिर हाई स्कूल डौंडी लोहारा का परिणाम ८४प्रतिशत रहा

छत्तीसगढ माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर द्वारा हाई स्कूल का परिणाम घोषित किया गया । जिसमें सरस्वती शिशु मंदिर डौंडी लोहारा का परिणाम ८४ प्रतिशत रहा। बहिन वर्षा कामड़े ८८'/. प्रथम, भैय्या गजेन्द्र देवांगन ८३.८३'/. द्वितीय, भैय्या सोमेस साहू ८२'/. तृत्तीय स्थान प्राप्त कर विद्यालय व नगर को गौरवांन्वित किया ।  कक्षा दसवीं में कुल १३ भैय्या बहन प्रथम, १० भैय्या बहन द्वितीय ,४ भैय्या बहन तृत्तीय प्राप्त किये ।  सफलता का परचम लहराने वाले समस्त भैय्या बहनों को विद्यालय परिवार की ओर से प्राचार्य खिलावन सिंह साहू जी, वरिष्ट आचार्य तोरन सिंह ठाकुर , सुरेस ठाकुर,  अशोक सिन्हा , तोषण चुरेन्द्र, प्रताप पटेल, डोमेन्द्र देसमुख, संजय देहारी, शीतल कोसमा, रमन ठाकुर, उमेस देवांगन, सेवंत देवांगन, संगीता सोनी , मंजुलता श्रीवास, प्रतिभा सुकतेल सहित नव ग्यानोदय शिक्षण समिति के अध्यक्ष दाऊ गोरेलाल राजपुत , व्यवस्थापक राघवेन्द्र नाथ जी मिश्र , कार्यकारिणी सदस्य सिया राम जी सार्वा, लोकनाथ जी निषाद , नंदु देसमुख, भोला राम साहू, राजेस साहू, सहित सभी सदस्यों ने मिलकर बधाई व शुभकामनाएं संप्रेषित की... उक्त जानकारी सुचना प्रचार प्रसार प्रमुख सेवंत देवांगन व शीतल कोसमा तथा परीक्षा प्रमुख ने दी.

टंकनकर्ता
तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

दीक्षांत समारोह

डौंडी लोहारा
सशिमं डौंडी लौहारा में कक्षा दशम का दीक्षांत समारोह कार्यक्रम का आयोजन संपन्न हुआ। जिसके मुख्य अतिथि श्रीमान गोरेलाल जी राजपूत अध्यक्षता श्रीमान खिलावन जी साहू विशेष अतिथि मिठ्ठूलाल जी रात्रे उपस्थित रहे।
इस अवसर पर अतिथियों द्वारा समस्त भैया बहनों को संबोधित करते हुये कहा कि सभी विद्यार्थी अपनी मेहनत पूरे मन लगा कर करें और शतप्रतिशत अंक लेकर सफलता प्राप्त कर अपने परिवार व विद्यालय का नाम रोशन करें।
अंत में दशम के भैया बहनों को स्मृति चिह्न भेंट कर बिदाई प्रदान की।तोषण कुमार तोषण कुमार चुरेन्द्र




शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

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स्वच्छता जागरण रैली

आज दिनांक २२/७/१५ को स्वच्छ भारत अभियान की परिपाटी मे स्वच्छता जागरण रैली में सम्मिलित हुए

यज्ञहवन एवं सरस्वती प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा

सरस्वती शिक्षा संस्थान छग रायपुर के रजत जयंती शुभ अवसर पर यज्ञहवन एवं सरस्वती प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में मान. सियाराम शार्वा(प्रांतीय सचिव) सुगनचंद जी जैन(समाज सेवी)बलराम गुप्ता (भाजपा मंडल अध्यक्ष)रामगुलाल साहू (वरिष्ठनागरिक) भारती देवागन(पार्षद) यशोदा भूआर्य ( पार्षद)गुणवंती गायकवाड(समाजसेवी) राघवेन्द्र नाथ जी मिश्र (सचिवसशिमं) समस्त आचार्य दीदीयां अभिभावकों का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। तोषण चुरेन्द्र आचार्य जी के द्वारा रजत जयंती वर्ष गीत का प्रस्तुतिकरण कियागया।

टिप्पणियाँ
यज्ञ हवन में सम्मिलित प्रातीय सचिव मान. श्री सियाराम जी शार्वा

वेदव्यासवेदव्यास

वेदव्यासवेदव्यासलेखक एक पात्र के रूप में, ऋषि वेदव्यास (जयसंहिता)हिंदू पौराणिक कथाओं के पात्रनाम:वेदव्यासअन्य नाम:कृष्णद्वैपायन, बादनारायणसंस्कृत वर्तनी:कृष्णद्वैपायनसंदर्भ ग्रंथ:महाभारत,श्रीमद्भगवद्गीता,पुराणउत्त्पति स्थल:यमुना तट,हस्तिनापुरमाता और पिता:सत्यवतीऔरपराशरपुत्र:शुकदेवऋषि वेदव्यासमहाभारतग्रंथ के रचयिता थे। वेदव्यास महाभारत के रचयिता ही नहीं, बल्कि उन घटनाओं के साक्षी भी रहे हैं, जो क्रमानुसार घटित हुई हैं। अपने आश्रम से हस्तिनापुर की समस्त गतिविधियों की सूचना उन तक तो पहुंचती थी। वे उन घटनाओं पर अपना परामर्श भी देते थे। जब-जब अंतर्द्वंद्व और संकट की स्थिति आती थी, माता सत्यवती उनसे विचार-विमर्श के लिए कभी आश्रम पहुंचती, तो कभी हस्तिनापुर के राजभवन में आमंत्रित करती थी। प्रत्येक द्वापर युग में विष्णु व्यास के रूप में अवतरित होकर वेदों के विभाग प्रस्तुत करते हैं। पहले द्वापर में स्वयं ब्रह्मा वेदव्यास हुए, दूसरे में प्रजापति, तीसरे द्वापर मेंशुक्राचार्य, चौथे मेंबृहस्पतिवेदव्यास हुए। इसी प्रकार सूर्य, मृत्यु, इन्द्र, धनजंय, कृष्ण द्वैपायन अश्वत्थामा आदि अट्ठाईस वेदव्यास हुए।इस प्रकार अट्ठाईस बार वेदों का विभाजन किया गया। उन्होने ही अट्ठारहपुराणोंकी भी रचना की, ऐसा माना जाता है। वेदव्यास यह व्यास मुनि तथा पाराशर इत्यादि नामों से भी जाने जाते है। वह पराशर मुनि के पुत्र थे, अत: व्यास 'पाराशर' नाम से भि जाने जाते है।महर्षि वेदव्यास को भगवान का ही रूप माना जाता है, इन श्लोकों से यह सिद्ध होता है।नमोऽस्तु ते व्यास विशालबुद्धे फुल्लारविन्दायतपत्रनेत्र।येन त्वया भारततैलपूर्णः प्रज्ज्वालितो ज्ञानमयप्रदीपः।।अर्थात् - जिन्होंने महाभारत रूपी ज्ञानके दीप को प्रज्वलित किया ऐसे विशाल बुद्धि वाले महर्षि वेदव्यास को मेरा नमस्कार है।व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे।नमो वै ब्रह्मनिधये वासिष्ठाय नमो नम:।।अर्थात् - व्यास विष्णु के रूप है तथा विष्णु ही व्यास है ऐसे वसिष्ठ-मुनि के वंशज का मैं नमन करता हूँ। (वसिष्ठ के पुत्र थे 'शक्ति'; शक्ति के पुत्र पराशर, और पराशर के पुत्र पाराशर (तथा व्यास))वेदव्यास के जन्म की कथापौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में सुधन्वा नाम के एक राजा थे। वे एक दिन आखेटके लिये वन गये। उनके जाने के बाद ही उनकी पत्नी रजस्वला हो गई। उसने इस समाचार को अपनी शिकारी पक्षी के माध्यम से राजा के पास भिजवाया। समाचार पाकर महाराज सुधन्वा ने एक दोने में अपना वीर्य निकाल कर पक्षी को दे दिया। पक्षी उस दोने को राजा की पत्नी के पास पहुँचाने आकाश में उड़ चला। मार्ग में उस शिकारी पक्षी को एक दूसरी शिकारी पक्षी मिल गया। दोनों पक्षियों में युद्ध होने लगा। युद्ध के दौरान वह दोना पक्षी के पंजे से छूट कर यमुना में जा गिरा।यमुनामेंब्रह्माके शाप से मछली बनी एक अप्सरा रहती थी। मछली रूपी अप्सरा दोने में बहते हुये वीर्य को निगल गई तथा उसके प्रभाव से वह गर्भवती हो गई। गर्भ पूर्ण होने पर एक निषाद ने उस मछली को अपने जाल में फँसा लिया। निषाद ने जब मछली को चीरा तो उसके पेट से एक बालक तथा एक बालिका निकली। निषाद उन शिशुओं को लेकर महाराज सुधन्वा के पास गया। महाराज सुधन्वा के पुत्र न होने के कारण उन्होंने बालक को अपने पास रख लिया जिसका नाम मत्स्यराज हुआ। बालिकानिषाद के पास ही रह गई और उसका नाम मत्स्यगंधा रखा गया क्योंकि उसके अंगों से मछली की गंध निकलती थी। उस कन्या को सत्यवती के नाम से भी जाना जाता है।बड़ी होने पर वह नाव खेने का कार्य करने लगी एक बार पराशर मुनि को उसकी नाव पर बैठ कर यमुना पार करना पड़ा।पराशरमुनिसत्यवतीरूप-सौन्दर्य पर आसक्त हो गये और बोले, "देवि! मैं तुम्हारे साथ सहवास करना चाहता हूँ।"सत्यवती ने कहा,"मुनिवर! आप ब्रह्मज्ञानी हैं और मैं निषाद कन्या। हमारा सहवास सम्भव नहीं है।" तब पराशर मुनि बोले, "बालिके! तुम चिन्ता मत करो। प्रसूति होने पर भी तुम कुमारी ही रहोगी।" इतनाकह कर उन्होंने अपने योगबल से चारों ओर घने कुहरे का जाल रच दिया औरसत्यवती के साथ भोग किया। तत्पश्चात् उसे आशीर्वाद देते हुये कहा, तुम्हारे शरीर से जो मछली की गंध निकलती है वह सुगन्ध में परिवर्तित हो जायेगी।"महर्षि वेदव्यास अपनी माता के साथसमय आने परसत्यवतीगर्भ से वेद वेदांगों में पारंगत एक पुत्र हुआ। जन्म होते ही वह बालक बड़ा हो गया और अपनी माता से बोला,"माता! तू जब कभी भी विपत्ति में मुझे स्मरण करेगी, मैं उपस्थित हो जाउँगा।" इतना कह कर वे तपस्या करने के लिये द्वैपायन द्वीप चले गये। द्वैपायन द्वीप में तपस्या करने तथा उनके शरीर का रंग काला होने के कारण उन्हे कृष्ण द्वैपायन कहा जाने लगा। आगे चल कर वेदों काभाष्य करने के कारण वे वेदव्यास के नाम से विख्यात हुये।वेद व्यास के विद्वान शिष्य*.पैल*.जैमिन*.वैशम्पायन*.सुमन्तुमुनि*.रोम हर्षणवेद व्यास का योगदानहिन्दू धर्म शास्त्रोंके अनुसार महर्षि व्यास त्रिकालज्ञ थे तथा उन्होंने दिव्य दृष्टि से देख कर जान लिया कि कलियुग में धर्म क्षीण हो जायेगा। धर्म के क्षीण होने के कारण मनुष्य नास्तिक, कर्तव्यहीन और अल्पायुहो जावेंगे। एक विशाल वेद का सांगोपांग अध्ययन उनके सामर्थ से बाहर हो जायेगा। इसीलिये महर्षि व्यास ने वेद का चार भागों मेंविभाजन कर दिया जिससे कि कम बुद्धि एवं कम स्मरणशक्ति रखने वाले भी वेदों का अध्ययन कर सकें। व्यास जी ने उनका नाम रखा -ऋग्वेद,यजुर्वेद,सामवेदऔरअथर्ववेद। वेदों का विभाजन करने के कारण ही व्यास जी वेद व्यास के नाम से विख्यात हुये। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद को क्रमशः अपने शिष्य पैल, जैमिन, वैशम्पायन और सुमन्तुमुनि को पढ़ाया। वेद में निहित ज्ञान के अत्यन्त गूढ़ तथा शुष्क होने के कारण वेद व्यास ने पाँचवे वेद के रूप में पुराणों की रचना की जिनमें वेद के ज्ञान को रोचक कथाओं के रूप में बताया गया है। पुराणों को उन्होंने अपने शिष्य रोम हर्षण को पढ़ाया। व्यास जी के शिष्योंने अपनी अपनी बुद्धि के अनुसार उन वेदों की अनेक शाखाएँ और उप शाखाएँ बना दीं। व्यास जी नेमहाभारतकी रचना की।गणेशमहाभारत लिखते हुए।व्यास जी गणेश सें महाभारत लिखवाते हुए,अंकोरवाट मंदिर।पौराणिक-महाकाव्य युग की महान विभूति, महाभारत, अट्ठारह पुराण, श्रीमद्भागवत, ब्रह्मसूत्र, मीमांसा जैसे अद्वितीय साहित्य-दर्शन के प्रणेता वेदव्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को लगभग ३००० ई. पूर्व में हुआ था। वेदांत दर्शन, अद्वैतवाद के संस्थापक वेदव्यास ऋषिपराशर के पुत्र थे। पत्नी आरुणी से उत्पन्न इनके पुत्र थे महान बाल योगी शुकदेव। श्रीमद्भागवत गीता विश्व के सबसे बड़े महाकाव्य 'महाभारत' का ही अंश है। रामनगर के किले में और व्यास नगर में वेदव्यास का मंदिर है जहॉ माघ में प्रत्येक सोमवार मेला लगता है। गुरु पूर्णिमा का प्रसिद्ध पर्व व्यास जी की जयन्ती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।पुराणों तथा महाभारत के रचयिता महर्षि का मन्दिर व्यासपुरी में विद्यमान है जो काशी से पाँच मील की दूरी पर स्थित है। महाराज काशी नरेश के रामनगर दुर्ग में भी पश्चिम भाग में व्यासेश्वर की मूर्ति विराजमान् है जिसे साधारण जनता छोटा वेदव्यास के नाम से जानती है। वास्तव में वेदव्यास की यह सब से प्राचीन मूर्ति है। व्यासजी द्वारा काशी को शाप देने के कारण विश्वेश्वर ने व्यासजीको काशी से निष्कासित कर दिया था। तब व्यासजी लोलार्क मंदिर के आग्नेय कोण में गंगाजी के पूर्वी तट पर स्थित हुए।इस घटना का उल्लेख काशी खंड में इस प्रकार है-लोलार्कादं अग्निदिग्भागे, स्वर्घुनी पूर्वरोधसि। स्थितो ह्यद्य्यापि पश्चेत्स:काशीप्रासाद राजिकाम्।। स्कंद पुराण, काशी खंड ९६/२०१व्यासजी ने पुराणों तथा महाभारत की रचना करने के पश्चात् ब्रह्मसूत्रों की रचनाभी यहाँ की थी। वाल्मीकि की ही तरह व्यास भी संस्कृत कवियों के लिये उपजीव्य हैं। महाभारत में उपाख्यानों का अनुसरण कर अनेक संस्कृत कवियों ने काव्य, नाटक आदि की सृष्टि की है। महाभारत के संबंध में स्वयं व्यासजी की ही उक्ति अधिक सटीक है-इस ग्रंथ में जो कुछ है, वह अन्यत्र है, पंरतु जो इसमें नहीं है, वह अन्यत्र कहीं भी नहीं है।यमुना के किसी द्वीप में इनका जन्म हुआ था। व्यासजी कृष्ण द्वैपायन कहलाये क्योंकि उनका रंग श्याम था। वे पैदा होते ही माँ की आज्ञा से तपस्या करने चले गये थे और कह गये थे कि जब भी तुम स्मरण करोगी, मैं आ जाऊंगा। वे धृतराष्ट्र, पाण्डु तथा विदुर के जन्मदाता ही नहीं, अपितु विपत्ति के समय वे छाया की तरह पाण्डवों का साथ भी देते थे। उन्होंने तीन वर्षों के अथक परिश्रम से महाभारत ग्रंथ की रचना की थी-त्रिभिर्वर्षे: सदोत्थायी कृष्णद्वैपायनोमुनि:। महाभारतमाख्यानं कृतवादि मुदतमम्।। आदिपर्व - (५६/५२)जब इन्होंने धर्म का ह्रास होते देखा तो इन्होंने वेद का व्यास अर्थात विभाग कर दिया और वेदव्यास कहलाये। वेदों का विभाग कर उन्होंने अपने शिष्य सुमन्तु, जैमिनी, पैल औरवैशम्पायन तथा पुत्र शुकदेव को उनका अध्ययन कराया तथा महाभारत का उपदेश दिया। आपकी इस अलौकिक प्रतिभा के कारण आपको भगवान का अवतार माना जाता है।संस्कृत साहित्य में वाल्मीकि के बाद व्यास ही सर्वश्रेष्ठ कवि हुए हैं। इनके लिखे काव्य 'आर्ष काव्य' के नाम से विख्यात हैं। व्यास जी का उद्देश्य महाभारत लिख कर युद्ध का वर्णन करना नहीं, बल्कि इस भौतिक जीवन की नि:सारता को दिखाना है। उनका कथन है कि भले ही कोई पुरुष वेदांग तथा उपनिषदों को जान ले, लेकिन वह कभी विचक्षण नहीं हो सकता क्योंकि यह महाभारत एक ही साथ अर्थशास्त्र, धर्मशास्त्र तथा कामशास्त्र है।१. यो विध्याच्चतुरो वेदान् साङ्गोपनिषदो द्विज:। न चाख्यातमिदं विद्य्यानैव स स्यादिचक्षण:।। २. अर्थशास्त्रमिदं प्रोक्तं धर्मशास्त्रमिदं महत्। कामाशास्त्रमिदं प्रोक्तं व्यासेना मितु बुद्धिना।। महा. आदि अ. २: २८-८३स्रोत*.सुखसागरके स

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गुरु पुर्णिमा

सशिमं डौंडीलोहारा मे गुरु पुर्णिमा मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मान सुरेश ठाकुर जी अध्यक्ष ता मान खिलावन सिंह साहू विशेष अतिथि मान तोरण ठाकुर जी रहे।।

शपथ ग्रहण समारोह

शपथ ग्रहण समारोह मे मुख्य अतिथि मान श्री रविकांत श्री वास्तव जी अध्यक्ष ता दाउगोरेलाल राजपूत विशेष अतिथि मान राजेश ठाकुर जी उपस्थित रहे॥ इनके सानिध्य मे नवोदित पदाधिकारी भैया बहनों को शपथ ग्रहण कराकर अपने दायित्व का निर्वहन करने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित किए।।

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बाबा तुलसीदास जी



इस अवसर पर प्राचार्य श्री खिलावन साहू द्वारा बाबा तुलसीदास जी के तैलचित्र पर पूजन अर्चना कर कार्यक्रम का श्री गणेश किया गया।। मिडिल व हाई स्कूल विभाग में आचार्य श्री डोमेन्द्र देशमुख कक्षाचार्य कक्षा अष्टम (नैतिक एवं आध्यात्मिक प्रमुख)एवं प्राथमिक विभाग में आचार्य सुरेश ठाकुर कक्षाचार्य कक्षा द्वितीय द्वारा बाबा तुलसीदास जी के जीवन से जुडे विभिन्न विषयों पर विस्तार पूर्ण बौद्धिक प्राप्त हुआ ।
और आचार्य तोषण चुरेन्द्र द्वारा श्री रामचरितमानस गान कर व्याख्या एवं गीत भजन प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ किया गया ।। जय श्री राम।।

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rakhi

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teacher day

िशकिदवसएवंकृणजमामीसंप सिशमंडडीलोहारामइसअवसरपरमुयअितथीिमलालराे उपथतहए। जसमराधाकृणसजाओितयोिगताकाआयोजतिकयागया। कायममदेवेजायसवालसयारामशारवाराघवेनाथिम लोकनाथिनशादसिमितकेपदाधकारगणमाताएंबहनेअिभभावक गणआचायदीदीयां उपथतरहे

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गणपति विसर्जित करते भैया एवं आचार्य गण

गणपति विसर्जित करते भैया एवं आचार्य गण

ganesh visarjan

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नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोहम् ।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते ।।१।।
प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये ।
अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिं
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं
स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत् ।।२।।
समुत्कर्षनिःश्रेयस्यैकमुग्रं
परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्रानिशम् ।
विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम् ।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम् ।।३।।
भारत माता की जय ।।

विधिक साक्षरता शिविर

विधिक साक्षरता शिविर २०१५

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rajat jayanti

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bhaiya bahno ki kalash

rajat jayanti ke pavan avsar par
kalash sajao pratiyogita sampnna
jisme bhaiyya bahno ne bad chad kar bhag liya
sthan prapt bhaiya bahno ki kalash

guru ghasidas jayanti pr karyakram

guru ghasidas jayanti pr karyakram ki prastuti karte bhayya bhan

mono

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शुभकामानएं।

रंगो का पावन पर्व होली आपको और आपके परिवार को खुशियों और सफलताओं की नई रंगत दे। चेहरे पर हर वक्त मुस्कान का गुलाल छाया रहे और आप हर वक्त अपने काम में सफलता को नये कीर्तिमान बनाते रहें। हमारी आपको और आपके पूरे परिवार को होली के पावन अवसर पर तहेदिल से हार्दिक शुभकामानएं।

जन्म दिवस की हार्दिक बधाई...

सशिमं डौंडीलोहारा परिवार की ओर से बहिन वेणुका देवांगन को जन्म दिवस की हार्दिक बधाई...

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

बसंतोत्सव


डौंडी लोहारा:-सरस्वती शिशु मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय डौंडी लोहारा में माँ सरस्वती के जन्मदिवस के पावन अवसर पर बसंत पंचमी पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ।इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मान.सियाराम जी शार्वा प्रांतीय सचिव अध्यक्षता मान.खिलावन साहू प्राचार्य विशेष अतिथि मान.राघवेन्द्र नाथ मिस्र जी रहे।
सर्व प्रथम अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
मुख्य वक्ता ने अपने वक्तव्य में कहा कि माघ शुक्ल पंचमी को संगीत काव्य कला शक्ति का सृजन हुआ ।आज ही के दिन पूरा ब्रह्माण्ड बसंत मय होना आरंभ कर देता है।मां शारदे को प्रकृति की देवी मानी जाती है।यह बसंत ऋतु के अवसर पर पूरा वातावरण समशीतोष्ण रहता है।कोयल कुंजने लगती है उपवन में नवपुष्प खिलने लगते है।
इस अवसर पर विद्यारंभ संस्कार ३०नवप्रवेशी भैया बहनों की अगुवाई में संपन्न हुआ ।साथ ही श्री इसाई राम बगमरिया गायत्री प्रज्ञापीठ डौंडीलोहारा के मार्गदर्शन द्वारा यज्ञहवन का आयोजन कर विद्यालय के समस्त भैया बहन आचार्य दीदियों द्वारा आहुति दी गई।
उक्त अवसर पर समस्त विद्यालय परिवार नव ज्ञानोदय शिक्षण समिति के पदाधिकारी सदस्य गण ,गणमान्य नागरिक ,मातृशक्ति,अभिभावक गण उपस्थित रहकर कार्यक्रम को संपन्न कराने में सहयोग प्रदान किये। यह जानकारी सुचना प्रचार प्रसार प्रमुख आचार्य तोषण कुमार चुरेन्द्र जी ने प्रदान की।